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Zindagi Shayari

किसी रोज़ याद न कर पाऊं तो खुदगर्ज़ न समझ लेना दोस्तों,
दरसल छोटी सी इस उम्र में परेशानिया बहुत हैं,
मैं भूला नहीं हूँ किसी को मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं ज़माने में,
बस थोड़ी ज़िन्दगी उलझ पड़ी है दो वक़्त की रोटी कमाने में|
कभी आंसू तो कभी ख़ुशी देखी,
हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी,
उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें,
हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी..
मंजिले बहुत है और अफ़साने भी बहुत है,
जिंदगी की राह में इम्तिहान भी बहुत है,
मत करो दुःख उसका जो कभी मिला नही
दुनिया में खुश रहने के बहाने भी बहुत है।
मशहूर होना पर मगरुर ना होना,
कामयाबी से नशे मे चूर ना होना,
मिल जाए सारी कायनात आपको अगर,
इसके लिए अपनो से कभी दूर मत होना..
जिन्दगी हसीन है जिन्दगी से प्यार करो,
है रात तो सुबह का इतजार करो,
वो पल भी आऐगा जिसका इतजार हैं आप को,
रब पर भरोसा और वक्त पे ऐतबार रखो।
तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल, उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे, खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे, सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह, जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा, मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर..
मंजिलें तो हासिल कर ही लेगे,
कभी किसी रोज,
ठोकरें कोई जहर तो नहीं ,
जो खाकर मर जायेगें.
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता,
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..
जो मुस्कुरा रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा…
जो चल रहा है, उसके पाँव में छाला होगा…

बिना संघर्ष के इन्सान चमक नही सकता, यारों…
जो जलेगा उसी दिये में तो, उजाला होगा…।
हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली।।